अक्टूबर 2017 मे झारखंड मे भूंख से हुई एक बच्ची की मौत
पर...........
भला कोई एक दिन भूखे रहकर नही मर सकता है........!!!!!!!
जरा सोचो कि वो कितने दिन भूखी रही होगी,
मानवता क्या तुम्हारी आत्मा नही जगी होगी,
इंसानियत तुम उस वक्त कहाँ थी जब बेचारी,
चंद निवालो की खातिर वो तड़प रही होगी,
जमीर तू किस बाजार बिकने चला गया था,
लाचार माँ जब अनाज के लिए यहाँ वहाँ भटकी होगी,
सरकारी गोदामों मे अनाज खराब होना मंजूर है,
मगर जरूरतमंदों को देना सबसे बड़ी गलती होगी,
ऐसे हालात है फिर भी सत्ता मे अहंकार है,
आज आंखों में अश्रुधार है,नैतिकता शर्मशार हैं,
चंद निवालों के अभाव में कहीं कोई मर जाये,
चंद निवालों के अभाव में कहीं कोई मर जाये,
ये क्रषि प्रधान देश की सबसे बड़ी हार है।
कमल “गुरुजी”
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