दोस्तों आज तक मैंने सिर्फ सुना ही था की सच्चाई और ईमानदारी से काम करने का अपना अलग ही मज़ा है और कहीं न कहीं अपने जीवन में इसे एक सूत्रवाक्य की तरह प्रयोग में लाता भी हूँl लेकिन कहीं न कहीं वास्तविकता की कसौटी पर अभी तक मैंने इसे परखा नहीं था और आज मुझे इसे परखने का एक मौका मिला-
हुआ यूँ की आज दिनांक २९/०१/२०१२ को मुझे लखनऊ से नई दिल्ली आना था और मेरे पास आने के लिए आरक्षित टिकेट नहीं था मगर मेरे मित्र देवेन्द्र का आरक्षण LKO NDLS AC EXP (गाडी संख्या-12233 ) में था इसलिए मैं एक अनारक्षित टिकेट लेकर उसके साथ ही गाड़ी में चढ़ गया और तय किया की जब टी.टी. आएगा तो उनसे बात करके बाकी का जुर्माना दे दिया जायेगा l थकान के कारण मैं जल्दी ही सो गया मगर देवेन्द्र बगल में ही बैठा था, करीब एक घंटे के बाद दो टी. टी. आ गए जो टिकेट भी जांच रहे थे और साथ ही साथ पैसे लेकर प्रतीक्षारत लोगों को साईड मिडिल बर्थ (side middle birth ) देने लगे क्यों की कोर्ट ने सभी गाड़ियों से साईड मिडिल बर्थ को हटाने का आदेश दिया था मगर सभी गाड़ियों से साईड मिडिल बर्थ अभी तक नहीं भी हटाई गयी थी l
टिकेट जांचते जांचते जब वो हमारे पास आये तो देवेन्द्र ने उनसे बात की मगर वो ५०० रुपये की मांग कर रहे थे फिर देवेन्द्र ने मुझे जगाया और सारी स्थिति मुझे बताई अब मैं भी उठ कर बैठ गया और उनसे बातें करने लगा प्रस्तुत हैं उस वार्तालाप की एक झलक-
टी टी (देवेन्द्र से )- हाँ तो क्या करना है
मैं (टी टी की तरफ देख कर) - सर कितना लगेगा
टी टी - ५०० में काम हो जायेगा
मैं - सर कुछ कम कर लीजिये ५०० तो बहुत ज्यादा है
टी टी (थोडा कड़क होकर)- नहीं इससे कम में कुछ नहीं होगा
मैं -जुर्माना कितने का लगेगा
टी टी (कुछ सोंचते हुए )- कुल मिलकर १०६० रुपये, अब आपकी मर्ज़ी है
मैं (झट से पर्स निकल कर १०६० रुपये टी टी को देते हुए कहा )- सर मुझे दूसरा वाला रास्ता पसंद हैं क्यों की कम से कम मुझे इस बात का संतोष तो रहेगा की मेरा ये पैसा सरकार के खाते में जायेगा l
टी टी (थोडा खिसियाते हुए)- चलिए आपके लिए हम जुर्माना ७५० किये देते हैं
मैं - नहीं मैं २५० रूपये के चक्कर में अपने आप को भ्रष्ट नहीं बनाना चाहता हूँ आप कृपया १०६० की पर्ची काटिएl
और वैसे भी ये सब आपकी समझ में अभी नहीं आयेगा हाँ जब आपके बच्चे भी इसी भ्रस्टाचार की समस्या से होकर गुजरेंगे तब आपको अपने किये पर पछतावा होगा और शर्म भी आयेगी और हाँ एक बात और की रेलवे के घाटे का सिर्फ एक ही कारण है की आप जैसे लोग उसमे से अपना फायदा पहले ही निकाल लेते हैl
इतना सुनकर बेचारे दोनों टीटी की शक्ल उतर गयी.......
टी टी - सर छोडिये भी हमे माफ़ कर दीजिये
मैं(थोडा तेज आवाज में ) - आपका क्या है आप तो १०-१५ साल में रिटायर हो जायेंगे लेकिन जिस भ्रस्टाचार को आप छोड़ जायेंगे उससे सारी उम्र तो हम जैसे नौजवानों को जूझना पड़ेगा l
अब उन सबी हालत देखने लायक हो गयी थी इधर देवेन्द्र ने भी उन्हें बहुत कुछ सुनाया और जब उसने बताया की हम लोग "अन्ना हजारे" के भ्रस्टाचार विरोधी मुहीम के कट्टर समर्थक है तो इतना सुनकर वो लोग और भी पानी पानी हो गए l
और कहा- सर अब कृपया आप शांत हो जाईये कहें तो मैं आपके पैर पकड़ लूं
मैं -नहीं कृपया ऐसा न करें और कृपा करके मेरी १०६० की पर्ची काटिए
टी टी - नहीं हम आपसे एक भी पैसा नहीं लेंगे आप कृपया आराम से सो जाइये हम आपके हाथ जोड़ते हैं l
मैं -नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ बिना पैसे दिए मैं नहीं सो सकता हूँ क्यों की अगर ऐसा हुआ तो कहीं न कहीं मैं भी जाने अनजाने भ्रस्टाचारी बन जाऊंगा l
टी टी- सर अब आप हमे और शर्मिंदा न करें और कहें तो मैं आपके पैर पकड़ लूं आप हमारी बर्थ पर सो जाएयेमुझे अब उनकी आँखों में पश्चाताप की भावना साफ़ दिखाई देने लगी थी इसलिए मैं भी उठकर अपना बिस्तर साइड मिडल बर्थ पर लगाने लगा कर लेट गया और फिर मैं सो गया मगर जब मैं लेटा तो मुझे एक बात का एहसास हुआ की ईमानदारी से जीना भले ही कठिन हो लेकिन ईमानदारी से जीने में अपना अलग ही मज़ा है l