Wednesday, December 19, 2012

क्या हम वाकई ऐसे समाज में रहने लायक है


पिछले 2-3 दिनों से पूरी दिल्ली सभी अख़बार,सभी समाचार चैनल और सभी सोशल साईट पर छाई हुई है और जिस कारण से ये सुर्ख़ियों में है ऐसा नहीं है की राजधानी में ये पहली बार हुआ है 2003 में बुद्धा जयंती पार्क , 2005 में धौला कुआँ का केस और ज्यादा दूर नहीं ये अभी साल की शुरुवात में गुवाहाटी का केस  और न जाने किंटने केस जो शयद इन अखबार की सुर्ख़ियों में न आने के कारन कभी सामने आये ही नहीं मगर कभी किसी ने ये जानने की कोशश की की आखिर उनमे लिप्त अपराधियों के साथ क्या हुआ उन्हें सजा मिली की नहीं........

अजी इन सब के बारे में हम क्यों सोंचे  हम तो बस दो चार दिन के लिए मोमबती जलायेंगे , शांति मार्च निकालेंगे और ज्यादा हुआ तो सरकार को गली देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर देंगे और फिर एक अगली सनसनी के लिए मोमबत्तियां जुटा कर रख लेंगे और इधर ये मीडिया वाले जो आरुशि हत्याकांड को 2-3 महीने में एक बार जरुर ले आते हैं मगर इस तरह के अपराधों के बारे में एक हफ्ते के बाद शायद  कोई ज़िक्र भी नहीं करते हैं l

आज हर जगह इस केस को गंभीरता से लेते हुए कड़े कानून बनाने की बात की जा रही है आखिर उससे क्या होगा ? क्या कड़ा कानून उस पीड़िता को पहले वाली ज़िन्दगी दे सकता है उसे कोई सभ्य (आज कल बस कहने को )अपने परिवार का हिस्सा बना सकता है नहीं न / कितनी अजीब बात है न जो समाज आज उस पीडिता के लिए पुरे देश में दुआएं कर रहा है उसे इस अंजाम तक लाने वाला भी इसी समाज का एक हिस्सा है और कुछ दिनों बाद वही अपराधी इस समाज के एक हिस्सा बन जायेगा मगर बेचारी पीडिता उम्र बार अपने अस्तित्व को तलशती रहेगी l

जब तक हमारा समाज इस तरह के अपराधी लोगों को स्वीकारता रहेगा ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी और अगर हम सभ्य बनकर यूँ ही चुप रहे और सोते रहे  (2-3 दिन शोर करने का मतलब ये नहीं होता की हम जाग गए हैं ) तो शायद आगे इससे भी जयादा और गंभीर अपराध देखने को मिलेंगे ये बस शुरुवात मात्र है l

Wednesday, May 2, 2012

"जागो ग्राहक जागो".........



सुनने में आया है की ऊपर देवलोक में देवताओं का बहुत बुरा हाल है शनि देव जी असहाय हो गए है, लक्ष्मी जी की कृपा भी स्वतः ही सबके पास आ रही है, कुबेर जी का खजाना भी घटने लगा है , राहू, केतु तो खुद ही बुरे समय में पहुँच गए है काफी खोज बीन से पता चला है की इसके लिए शनि सुरक्षा कवच, लक्ष्मी धन वर्षा यन्त्र, कुबेर कुंजी , और दुसरे वो तमाम उत्पाद जिम्मेदार हैं जिनके बारे में भारतीय टेलीविजन के सभी प्रमुख चैनल पर "जागो ग्राहक जागो" के मिथ्या उच्चारण के बाद प्रसारण किया जाता है ll

विश्स्वस्त सूत्रों- से ज्ञात हुआ है की CBI के छापेमारी के दौरान राजा, कनीमोझी और कल माड़ी के घर से अधिकाधिक मात्र में लक्ष्मी धन वर्षा यन्त्र, कुबेर कुंजी प्राप्त हुए थे जिन्हें सोनि(या) ने अपने पास रख लिया है ll

Friday, April 27, 2012

अब राजनैतिक गलियारों में क्रिकेटर भी भाग्य आजमाएंगे.....



एक खबर - अब राजनैतिक गलियारों में क्रिकेटर भी भाग्य आजमाएंगे l
हो भी क्यों ना जब क्रिकेट के गलियारों में राजनेता (शरद पवार, राजीव शुक्ल जैसे निकम्मे लोग ) घुस सकते हैं तो फिर राजनीती में क्रिकेटर क्यों नहीं  ?

वैसे भी आज कल टेलीविजन पर एक चिप्स बेचने वाली कंपनी का प्रचार आता है जिसमे किचेन में काम करने वाले लोग क्रिकेट के मैदान पर आ जाते हैं और अम्पायर के पूछने पर कहते हैं की जब क्रिकेटर लोग किचेन में आ जायेंगे फिर उन्हें तो मज़बूरी में मैदान में आना ही पड़ेगा 
मुझे लगता है की क्रिकेट के भगवान् कहे जाने वाले सचिन और अन्य क्रिकेटरों की भी कुछ ऐसी ही मज़बूरी हो गयी है क्यों की जब राजनीती करने वाले (शरद पवार, राजीव शुक्ल और तमाम निकम्मे लोग) क्रिकेट में घुस जायेंगे तो बेचारे क्रिकेटर अपनी रोजो रोटी के लिए कहीं तो हाथ पैर मारेंगे ही 

Tuesday, March 27, 2012

"चोर की दाढ़ी में तिनका"



जब जंतर मंतर पर केजरीवाल ने एक मुहावरा कहा की "चोर की दाढ़ी में तिनका" और इस पर अगले दिन हमारे संसद में जम कर हंगामा हुआ लोगों के साथ साथ विपक्ष की नेता शुष्मा स्वराज भी बहुत खफा थी और कह रही थी कितनी शर्म की बात है की सारे सांसदों को चोर कहा गया है इस पर मैंने कहा की अरे मैडम जी केजरीवाल जी ने तो सिर्फ मुहावरा बोला था इस पर नाराज़ मैडम जी ने देखते हुए कहा की मुझे मत समझाइये  इतना तो मुझे भी पता है की कहाँ के सांसद चोर हैं और ये किसके बारे में कहा गया है .........

हंगामा है क्यूँ बरपा ..........



अन्ना के आन्दोलन के बाद आजकल सांसद में बहुत हंगामा हो रहा है और होना भी चाहिए आखिर जब लोग अपने बाप की नहीं सुनते हैं तो फॉर आप की क्यों सुने और वैसे भी बात तभी बुरी लगती है जब उसका कहीं न कहीं से आपसे सम्बन्ध हो और अगर आप ये सोंचते हैं की वोटों की भीख मांग कर चुनाव जीत कर सिर्फ आप ही एक आदरणीय बन जाते है तो ये आपकी भूल है आपको अपनी और उन सांसदों (जिन पर न जाने कितने ही केस दर्ज हैं) की गरिमा की फ़िक्र है और यही फ़िक्र तब कहाँ चली जाती है जब पाकिस्तान संविधान के मंदिर पर हमला करता है, जब दिग्गी जैसा आदमी अपने बाप की उम्र के लोगों को ठग और चोर बताता है, जब अडवाणी जैसे लोग पाकिस्तान जाकर जिन्ना को  सेकुलर बताते हैं ,जब फूलन देवी को पद और गोपनीयता की सपथ दिलाई जाती है, सदन में नोट उछाले जाते हैं  तब कहाँ सो जाता है आपका ये स्वाभिमान आपका ये आत्मसम्मान ll  

आप सब की असलियत  तेजनारायण बेचैन की बस ये चार पंकियाँ ही बयां कर देती है .....

"तोप, तमंचे, छुरे, कतरनी, पैने-चाकू भेज दिए ,
सरहद की रक्षा करने कई वीर लड़ाकू भेज दिए,
चम्बल के खेतों में अब तो कवितायें लहरातीं हैं ,
जितने भी थे हम ने चुन कर 'दिल्ली' डाकू भेज दिए ......ll

Monday, January 30, 2012

"अन्ना के आन्दोलन का असर ........."



दोस्तों आज तक मैंने सिर्फ सुना ही था की सच्चाई और ईमानदारी से काम करने का अपना अलग ही मज़ा है और कहीं न कहीं अपने जीवन में इसे एक सूत्रवाक्य की तरह प्रयोग में लाता भी हूँl लेकिन कहीं न कहीं वास्तविकता की कसौटी पर अभी तक मैंने इसे परखा नहीं था और आज मुझे इसे परखने का एक मौका मिला-

हुआ यूँ की आज दिनांक २९/०१/२०१२ को मुझे लखनऊ से नई दिल्ली आना था और मेरे पास आने के लिए आरक्षित टिकेट नहीं था मगर मेरे मित्र देवेन्द्र का आरक्षण LKO NDLS AC EXP (गाडी संख्या-12233 ) में था इसलिए मैं एक अनारक्षित टिकेट लेकर उसके साथ ही गाड़ी में चढ़ गया और तय किया की जब टी.टी. आएगा तो उनसे बात करके बाकी का जुर्माना दे दिया जायेगा l थकान के कारण मैं जल्दी ही सो गया मगर देवेन्द्र बगल में ही बैठा था, करीब एक घंटे के बाद दो टी. टी. आ गए जो टिकेट भी जांच रहे थे और साथ ही साथ पैसे लेकर प्रतीक्षारत लोगों को साईड मिडिल बर्थ (side middle birth ) देने लगे क्यों की कोर्ट ने सभी गाड़ियों से साईड मिडिल बर्थ को हटाने का आदेश दिया था मगर सभी गाड़ियों से साईड मिडिल बर्थ अभी तक नहीं भी हटाई गयी थी l
टिकेट जांचते जांचते जब वो हमारे पास आये तो देवेन्द्र ने उनसे बात की मगर वो ५०० रुपये की मांग कर रहे थे फिर देवेन्द्र ने मुझे जगाया और सारी स्थिति मुझे बताई अब मैं भी उठ कर बैठ गया और उनसे बातें करने लगा प्रस्तुत हैं उस वार्तालाप की एक झलक-

टी टी (देवेन्द्र से )- हाँ तो क्या करना है
मैं (टी टी की तरफ देख कर) - सर कितना लगेगा
टी टी - ५०० में काम हो जायेगा
मैं - सर कुछ कम कर लीजिये ५०० तो बहुत ज्यादा है
टी टी (थोडा कड़क होकर)- नहीं इससे कम में कुछ नहीं होगा
मैं -जुर्माना कितने का लगेगा
टी टी (कुछ सोंचते हुए )- कुल मिलकर १०६० रुपये, अब आपकी मर्ज़ी है
मैं (झट से पर्स निकल कर १०६० रुपये टी टी को देते हुए कहा )- सर मुझे दूसरा वाला रास्ता पसंद हैं क्यों की कम से कम मुझे इस बात का संतोष तो रहेगा की मेरा ये पैसा सरकार के खाते में जायेगा l
टी टी (थोडा खिसियाते हुए)- चलिए आपके लिए हम जुर्माना ७५० किये देते हैं
मैं - नहीं मैं २५० रूपये के चक्कर में अपने आप को भ्रष्ट नहीं बनाना चाहता हूँ आप कृपया १०६० की पर्ची काटिएl
और वैसे भी ये सब आपकी समझ में अभी नहीं आयेगा हाँ जब आपके बच्चे भी इसी भ्रस्टाचार की समस्या से होकर गुजरेंगे तब आपको अपने किये पर पछतावा होगा और शर्म भी आयेगी और हाँ एक बात और की रेलवे के घाटे का सिर्फ एक ही कारण है की आप जैसे लोग उसमे से अपना फायदा पहले ही निकाल लेते हैl
इतना सुनकर बेचारे दोनों टीटी की शक्ल उतर गयी.......
टी टी - सर छोडिये भी हमे माफ़ कर दीजिये
मैं(थोडा तेज आवाज में ) - आपका क्या है आप तो १०-१५ साल में रिटायर हो जायेंगे लेकिन जिस भ्रस्टाचार को आप छोड़ जायेंगे उससे सारी उम्र तो हम जैसे नौजवानों को जूझना पड़ेगा l
अब उन सबी हालत देखने लायक हो गयी थी इधर देवेन्द्र ने भी उन्हें बहुत कुछ सुनाया और जब उसने बताया की हम लोग "अन्ना हजारे" के भ्रस्टाचार विरोधी मुहीम के कट्टर समर्थक है तो इतना सुनकर वो लोग और भी पानी पानी हो गए l
और कहा- सर अब कृपया आप शांत हो जाईये कहें तो मैं आपके पैर पकड़ लूं  
मैं -नहीं कृपया ऐसा न करें और कृपा करके मेरी १०६० की पर्ची काटिए
टी टी - नहीं हम आपसे एक भी पैसा नहीं लेंगे आप कृपया आराम से सो जाइये हम आपके हाथ जोड़ते हैं l
मैं -नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ बिना पैसे दिए मैं नहीं सो सकता हूँ क्यों की अगर ऐसा हुआ तो कहीं न कहीं मैं भी जाने अनजाने भ्रस्टाचारी बन जाऊंगा l
टी टी- सर अब आप हमे और शर्मिंदा न करें और कहें तो मैं आपके पैर पकड़ लूं आप हमारी बर्थ पर सो जाएयेमुझे अब उनकी आँखों में पश्चाताप की भावना साफ़ दिखाई देने लगी थी इसलिए मैं भी उठकर अपना बिस्तर साइड मिडल बर्थ पर लगाने लगा कर लेट गया और फिर मैं सो गया मगर जब मैं लेटा तो मुझे एक बात का एहसास हुआ की ईमानदारी से जीना भले ही कठिन हो लेकिन ईमानदारी से जीने में अपना अलग ही मज़ा  है l

Monday, January 23, 2012

नेता जी के वादे ........(और उसमे छुपे इरादे )

आजकल सारे उत्तर प्रदेश में नवजवानों का बस एक ही सपना है की किसी तरह से मुलायम चाचा की सरकार आ जाये और हो भी क्यों न चाचा ने इतने लुभावने वादे जो किये हैं .......
उन्ही वादों के साथ प्रस्तुत है नेता जी की इन वादों के पीछे छुपे इरादे -

* दसवीं और बारहवीं पास करने वालों को टेबलेट कंप्यूटर और लैपटॉप दिया जायेगा - आखिर खि(सि)ब्बल  का कबाड़ (आकाश) कब काम आयेगा l
*६५ साल से ज्यादा की उम्र के किसानों को पेंसन दी जाएगी-उसे परेशान कर कर के ६५ साल के पहले ही आत्हत्या करने पर मजबूर कर देंगे l 
*किसानो को मुफ्त बिजली दी जाएगी - ताकि बेचारे किसान आत्महत्या के लिए कोई और विकल्प न चुने l
*लखनऊ दिल्ली एक्सप्रेस वे- क्या सिर्फ माया जी को ही एक्सप्रेस वे बनवाकर पैसे कमाना आता है l
*गैर सरकारी अभियांत्रिकी संस्थानों में गरीब छात्रों को फीस माफ़ी- फीस छात्रों से नहीं उनके घरवालों से वसूली जाएगी l 
*आलू और दूसरी सब्जियों का निर्यात- ताकि हमारी सरकार में आलू के दाम पेट्रोल के बराबर हो जाएँ l
* २० से २२ घंटे की बिजली उपलब्धता (गाँव और दूर दराज़ के क्षेत्रों में )- जैसे नॉएडा गाँव, लखनऊ गाँव l
*हिरासत में लिए गए निर्दोष को रिहा करना- ये तो बहुत जरुरी है क्यों की सबसे ज्यादा निर्दोष तो मेरे ही राज में फसाए जाते हैं l
*छात्र संघ चुनाव करना- ताकि फ्री फंड में भीड़ और उपद्रविओं का जुगाड़ किया जा सके l

Tuesday, January 10, 2012

माया महा ठगिन हम जानी

अभी प्राप्त सूचना के आधार पर ज्ञात हुआ की अकेले लखनऊ में मायावती द्वारा बनवाई गयी प्रतिमाओ की पर्दादारी के काम में करीब १ करोड़ रुपये का खर्चा हुआ है अब जनता खुद ही अंदाज़ा लगाये की इनको बनवाने में कितनी लागत आयी होगी ?
गनीमत है चुनाव आयोग ने सिर्फ  प्रतिमाओ को ही ढकने का ही निर्देश दिया अगर कहीं उनके (माया) द्वारा बनवाए गए पार्कों और स्मारकों को ढकने के निर्देश दे देता तो निश्चित ही उत्तर प्रदेश बजट का ५० प्रतिशत से भी ज्यादा इस काम में ही खर्च हो जाता .............l
कबीरदास जी ने तो पहले ही कहा था लकिन आज समझ में आया -
माया महा ठगिन हम जानी 
तिर्गुन फांस लिए कर .......ll