Friday, December 23, 2011

हमारे माननीय नेताओं से एक सवाल ..........

हमारे माननीय नेताओं से एक सवाल ..........

मेरा सवाल संजय निरुपम और इनके जैसे उन सभी नेताओं से है जिन्हें देश की बजाय संसद की गरिमा की ज्यादा फ़िक्र है 
कल संजय निरुपम (जो मुंबई में उत्तर भारतियों के द्वारा चुने गए एकमात्र उत्तर भारतीय नेता हैं और साथ ही साथ दल बदलू भी ) की बहस सुन रहा था संजय निरुपम वहीँ हैं जिन्हें लोगों ने बड़ी आस के साथ चुना था और लोगों की उम्मीदों पर वो कितना खरे उतरे ये हम सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं जो उत्तर भारतीओं को ठाकरे बंधुओ से बचाने के बजाय आज कल राहुल गाँधी को लोगो (जनता) के कटाक्ष से बचाने में लगे हुए है  बहस में कई बार उन्होंने अन्ना के आचरण को संसद का अपमान बताया मगर मैं ये नहीं समझ पाता हूँ की उसी संसद में जब ये अनपढ़, जाहिल और बिन बुद्धि के लोग असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करते हैं, लोकसभा/राज्यसभा अध्यक्ष पर कागज फेके जाते हैं , अच्छा खासा हाल जब कुश्ती का एक अखाड़ा बन जाता है, लालू जैसे लोग अपनी मसखरेपन से वहां के लोगों का मनोरंजन करते हैं , बीच बहस में नोटों के बण्डल दिखाए जाते हैं तब उस गरिमा का ख्याल कहाँ चला जाता है .........
क्या आप जैसे मुट्ठी भर नेताओं ने ही इस संसद की गरिमा के मापदंड बनाने का ठेका ले रखा है हम जनता की कोई अहमियत नहीं है जिसने इन जैसे लोगों को वहां जाने लायक बनाया है और ये बात कतई मत भूलना की अन्दर तुम जैसे नमकहरामो और गद्दार नेताओं को बचाने के लिए बहार जनता के बेटों ने ही अपने सीने पर गोलियां खायी थी .......

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