लगता है आज कल राजनीति अपने निम्नतम स्तर पर आ गयी है, जहाँ पर एक राजनेता और एक अपराधी या लुटेरा में अंतर बता पाना संभव नहीं हो पता है l आज के राजनैतिक परिद्रश्य को देखते हुए ऐसे लोगों की संख्या में बड़ी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है, और इसका श्रेय नेतृत्व में निरंकुशता और अक्षमता को जाता है l आज केंद्र और अधिकतर राज्यों में यही चल रहा है, हमारे उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, जहाँ "बहिन जी" ने पूरे पांच साल सिर्फ पार्कों और स्मारकों के निर्माण और सुन्दरीकरण में बिता दिए और अब जब चुनाव की तलवार सर पर लटक गयी है तब उन्हें आम जनता की फ़िक्र होने लगी है ( दोस्तों नेताओं की इस तरह और इस वक़्त पर फ़िक्र करना बहुत ही खतरनाक होता है क्यों की ऐसी ही सत्ता लोलुपों की फ़िक्र ने पकिस्तान भी बनाया था) l और अब वो फिर से सत्ता में आने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है और उसी का नतीजा है प्रदेश के चार टुकड़े अगर यही हाल रहा तो कल को केंद्र में चुनाव आने पर केंद्र सरकार अपनी सत्ता बचाने की खातिर देश को भी चार हिस्सों (खालिस्तान और जम्मू कश्मीर की तरह मांग कर रहे कई अन्य .....) में बटने से पीछे नहीं हटेगी l इसलिए आइये सत्ता के इस खेल को अच्छी तरह समझे और इस तरह के प्रलोभन देने वालों को मुहतोड़ जवाब दे l
दिनकर जी शब्दों में ........
सदियों की ठंडी बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती हैं,
दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,
सिंघासन खाली करो की जनता आती हैं ।
दिनकर जी शब्दों में ........
सदियों की ठंडी बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती हैं,
दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,
सिंघासन खाली करो की जनता आती हैं ।