एक दोपहर कुछ आवारा कुत्तों के साथ ..........
आज दोपहर में जब मैं भोजन करने अपने घर जा रहा था तो देखा की हमारे मोहल्ले में आवारा कुत्ते पकड़ने का एक दल आया हुआ है जो गली में घूमते हुए आवारा कुत्तों को पकड़ पकड़ कर एक बंद गाडी में डाल रहे थे, उन्हें देखने वालों की बदुत भीड़ थी इसलिए मैं थोड़ी देर रूककर तमाशा देखने लगा कुछ देर तक खड़े रहकर मैंने गौर किया कर्मचारी सिर्फ उन्ही कुत्तों को पकड़ रहे है जो या तो बहुत आलसी है, लालची हैं या फिर उन्हें अपनी आज़ादी के मायने नहीं मालुम हैं लेकिन जो थोडा भी सजग हैं चपल हैं और अपनी आज़ादी के प्रति जागरूक हैं वो तो उन कर्मचरियों की पहुँच में आ नहीं रहे थे और जो बेचारे धोखे से आ भी जाते थे तो स्वयं को छुड़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते थे और आजाद होने में बहुत सफल भी हुए खैर चूँकि भोजन करके मुझे ऑफिस भी जाना था इसलिए थोड़ी देर बाद मैं वहां से चला आया लेकिन पूरे रास्ते मैं बस एक ही बात सोंच रहा था की अगर वो आवारा कुत्ते तक अपनी आज़ादी का मतलब जानते हैं तो फिर हमारी अक्ल को क्या हो जाता है.....
आज दोपहर में जब मैं भोजन करने अपने घर जा रहा था तो देखा की हमारे मोहल्ले में आवारा कुत्ते पकड़ने का एक दल आया हुआ है जो गली में घूमते हुए आवारा कुत्तों को पकड़ पकड़ कर एक बंद गाडी में डाल रहे थे, उन्हें देखने वालों की बदुत भीड़ थी इसलिए मैं थोड़ी देर रूककर तमाशा देखने लगा कुछ देर तक खड़े रहकर मैंने गौर किया कर्मचारी सिर्फ उन्ही कुत्तों को पकड़ रहे है जो या तो बहुत आलसी है, लालची हैं या फिर उन्हें अपनी आज़ादी के मायने नहीं मालुम हैं लेकिन जो थोडा भी सजग हैं चपल हैं और अपनी आज़ादी के प्रति जागरूक हैं वो तो उन कर्मचरियों की पहुँच में आ नहीं रहे थे और जो बेचारे धोखे से आ भी जाते थे तो स्वयं को छुड़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते थे और आजाद होने में बहुत सफल भी हुए खैर चूँकि भोजन करके मुझे ऑफिस भी जाना था इसलिए थोड़ी देर बाद मैं वहां से चला आया लेकिन पूरे रास्ते मैं बस एक ही बात सोंच रहा था की अगर वो आवारा कुत्ते तक अपनी आज़ादी का मतलब जानते हैं तो फिर हमारी अक्ल को क्या हो जाता है.....
खैर कुछ भी हो लेकिन आज वो आवारा कुत्ते (जो संघर्ष करके आज़ादी के मज़े ले रहे थे ) मुझे आवारा नहीं लग रहे थे बल्कि एक स्वाभिमानी, क्रांतिकारी वीर की झलक उनमे नज़र आ रही थी जो मुझसे कहीं न कहीं पूछ रही थी की क्यों तुम कब अपनी आज़ादी की कीमत को समझोगे.......