Monday, August 9, 2010

त्रिवेणी


तुझमें  बिखेरने  का हुनर है,
मुझमें  सवंरने का हुनर है ,
तुझसे हारने की खातिर मै आज तलक बिखरा हूँ 

कमल "तनहा"
०१:१७ a.m., ०९/०८/२०१० 

त्रिवेणी


आओ बदल लें  एक दूसरे की यादों को,
आओ बदल लें एक दूसरे के ख्वाबों को,
फिर बताना कौन किसको कितना सताता है I

कमल "तनहा"
०१:०९ a.m. , ०९/०८/२०१०

त्रिवेणी

ज़िन्दगी से मुझे कोई शिकवा न होगा,
मौत से  भी मेरा कोई  गिला न होगा ,
सिर्फ तेरे रूठने और मानने भर का फासला है दोनों में I 

कमल "तनहा"
०१:०२ a.m., ०९/०८/२०१० 

त्रिवेणी

ख़त बनकर तेरे हाथों में मचलना है मुझे,
मज़मून बनकर तेरे लबों को छुना हैं मुझे,
बस पहुँच जाऊं सलामती से एक बार तेरे दिल के पते पर I

कमल "तनहा" 
१२:५३ a.m., ०९/०८/२०१०   

Monday, August 2, 2010

"ज़िन्दगी"

किसी के लिए खुली किताब है ज़िन्दगी,
किसी के लिए यूँ ही लाजवाब है ज़िन्दगी,
हर किसी की आँखों से आंसुओं को चुरा सके 
हमारे लिए तो ऐसा ही ख्वाब है ज़िन्दगी,
हर एक सांस का जवाब है ज़िन्दगी,
दिल की धडकनों की मंद आवाज़ है ज़िन्दगी,
ज़रा संभल के खर्च करना ये साँसे ये धड़कने,
"तन्हा" हर सांस हर धड़कन का हिसाब है ज़िन्दगी I

कमल वर्मा"तन्हा"
एक ज़रा सी बात पे उम्र भर को रूठने वाले,
तेरे बिना तो ये ज़िन्दगी भी सजा होती है, 
अब तो आ जा के अब "तन्हा" रहा नहीं जाता,
आखिर यूँ रूठने की भी कोई इन्तहा होती है l






Kamal - on 24/10/2009 at 11:30 am