Kamal Verma
Monday, June 14, 2010
"त्रिवेणी"
जब मैं तनहा होता हूँ,
ना जाने कहाँ कहाँ होता हूँ,
सुना है कल तेरी पलकों की देहलीज तक आ गया था.....
01:00 am 14/06/2010
Wednesday, June 9, 2010
"त्रिवेणी"
आओ बैठो फिर झगड़ लेंगे कभी,
आज कुछ नयी सी बात करते है ,
वैसे भी एक ही बात पे लड़ते हुए बहुत वक़्त हो गया है I
12:31 am 09/06/2010
"त्रिवेणी"
अब मुनासिब नहीं है की कुछ लिखा जाये,
तेरी तारीफ में मेरे अल्फाजों को परखा जाये,
क्यों की एक दूजे पे तोहमत लगायेंगे एक दूजे के चाहने वाले .....
12:10 am, 06/09/10
Friday, June 4, 2010
"त्रिवेणी"
तुझसे मिलना, चंद खवाबों का सजोना,
तुझसे बिछड़ना, उम्र भर का रोना ,
*
*
*
इस चार दिन की ज़िन्दगी की चार बातें ही याद है..
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