क्या तारीफ़ करें आपकी हर नज़्म की "कमल"
बड़े दिनों बाद यूँ महके हुआ अलफ़ाज़ मिले हैं,
कुछ तो छुपाया गया है जो दिखता नहीं है नज़रों से,
आपकी हर नज़्म में मुझको यही सवालात मिले है ll
१४:०१ , १९ जुलाई २००७
बड़े दिनों बाद यूँ महके हुआ अलफ़ाज़ मिले हैं,
कुछ तो छुपाया गया है जो दिखता नहीं है नज़रों से,
आपकी हर नज़्म में मुझको यही सवालात मिले है ll
१४:०१ , १९ जुलाई २००७
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