वो शायद इतना बेवफा न था,
या मुझे असलियत का पता न था,
पागलों सा उम्र भर ढूढता रहा उसे,
जिसका मेरे पास कोई पता न था,
अब मिलता है तो ऐसे अजनबी की तरह,
जैसे पहले से मेरा उससे कोई वास्ता न था,
सारे शहर में वो दीवाने सा मशहूर हो गया,
कल तक जिसे घर में कोई जनता न था,
ज़िन्दगी ने ही जब दगा दे दिया हो जिसे,
मौत से फिर उसका कोई शिकवा न था,
अब भी याद है वो आंसू पी के रात बिताना,
"तन्हा"क्या करता उसके शहर में कोई मयकदा न था II
द्वारा- कमल वर्मा "तन्हा"
01:59 am 14/12/2004
पागलों सा उम्र भर ढूढता रहा उसे,
जिसका मेरे पास कोई पता न था,
अब मिलता है तो ऐसे अजनबी की तरह,
जैसे पहले से मेरा उससे कोई वास्ता न था,
सारे शहर में वो दीवाने सा मशहूर हो गया,
कल तक जिसे घर में कोई जनता न था,
ज़िन्दगी ने ही जब दगा दे दिया हो जिसे,
मौत से फिर उसका कोई शिकवा न था,
अब भी याद है वो आंसू पी के रात बिताना,
"तन्हा"क्या करता उसके शहर में कोई मयकदा न था II
द्वारा- कमल वर्मा "तन्हा"
01:59 am 14/12/2004